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तर्ज-कोयलिया (मारवाङी)
कोयलियाss कुहू कुहू गीत सुनाये रेss
दश धरम निभावां आवो मिलकर आजss
कि भव सेss ये ही पार लगायेss
1
ओ साsथी कोप ना कीsजे पीतमा
सब मिलकर धरे, हृदय में क्षमा विवेक
कि भव सेs नैय्या पाsर लगायेs
2
ओ साsथी मान महाs विषरूप है
आवो हो जायें कोमल सुधा अनूप
कि भव से नैय्या पाsर लगायेs
3
ओ साsथी कपट न कीजो कोय जी
आवो हो जाये मन से सरल स्वभाव
कि भव से नैय्या पाsर लगाये
4
ओ साथी पर निन्दा अरू झूठ तजो
जग में सतवादी सच्चे सुख को पाय
कि भव से नैय्या पार लगाये
5
ओ साथी लोभ पाप को बाप है
आवो सब मिलकर धरे हृदय संतोष
कि भव से नैय्या पार लगाये
6
ओ साथी विषय चोर बहू फिरत है
मन वश में कर तूं संयम रतन संभाल
कि भव से नैय्या पार लगाये
7
ओ साथी तप चाहे सुरराय जी
शक्ति सम कर लो तप सब मिलकर आज
कि भव से नैय्या पार लगाये
8
ओ साथी दान चार प्रकार है
दानी को कोई हानी नहीं बताय
कि भव से नैय्या पार लगाय
कोयलिया कुहू कुहू गीत सुनाये रे
दश धरम निभावां आवो मिलकर आज
कि भव से ये ही पार लगाये
रचयिता -राजू बगडा-"राजकवि"(सुजानगढ़)मदुरै
2.9.1992
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