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तर्ज और इस दिल में क्या रक्खा है (ईमानदार)(राग-चारूकेशी)
और प्रभु मैंss कुछ ना चाहूँss 2
तेरा ही नामss जुबां पर चाहूँss 2
अन्तिम साँस जो, तन से निकलेss 2
तेरा ही नामsss , जपता जाऊंss
1
कभी जाने अनजाने, कितने जीवों को मारा ]
पीsड़ा पहुंचाकर उनको, बना मैं इक हत्यारा ] 2
क्षमा मांगता हूं,उन सबसे जिनको कष्ट दिया
जिनको कष्ट दियाss
और इस दिल मेंss क्याss रक्खा हैss 2
क्षमा का भाव छुपाss रक्खा है
क्षमा काs भावs छुपाss रक्खा हैss
और प्रभु मैंss कुछ ना चाहूँss
तेरा ही नामss जुबां पर चाहूँss
2
हुआ मैं रागी द्वेषी,बना हूं मैं अभिमानी]
सभी को दुःख पहुंचाके,करी मैने मनमानी ]2
क्षमा मांगता हूं,उन सबसे जिनको कष्ट दिया
जिनको कष्ट दियाss
और इस दिल में क्याs रक्खा हैss
क्षमा का भाव छुपाss रक्खा है
क्षमा का भाव छुपाss रक्खा है
और प्रभु मैंss कुछ ना चाहूँss
तेरा ही नामss जुबां पर चाहूँss
रचयिता -राजू बगडा-"राजकवि"(सुजानगढ़)मदुरै
27.8.2025 (00.10 am)
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