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Tuesday, December 30, 2008

31 तर्ज -रात कलि इक ख्वाब में आयी (बुड्ढा मिल गया)(राग-खमाज)

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www.rajubagra.blogspot.com 
तर्ज -रात कलि इक ख्वाब में आयी (बुड्ढा मिल गया)(राग-खमाज)

आज प्रभु तेरे चरणों में आकर -जीवन मेरा धन्य हुआ
सुबह सुबह तेरे दर्शन पाकर -मन अत्यंत प्रसन्न हुआ

यूँ तो जगत में ,चाँद और सूरज ,करते है रोज उजियारे
पर तेरे ज्ञान की ,जोत से मिटते , आतम के अंधियारे
तेरी चमक से ,मेरे जीवन में
ज्ञान का फिर संचार हुआ -------------आज प्रभु

जनम जनम से, भवसागर में ,कर्मो के जाल बुने है
उन जालो में ,फंसकर क्या क्या ,दुःख ना मैंने सहे है
तेरे ज्ञान की ज्योती से मुझको
कर्मों की लीला का भान हुआ ---------आज प्रभु

रचयिता -राजू बगडा-"राजकवि"(सुजानगढ़)मदुरै
ताः-30.12.2008
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