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तर्ज़-अच्छे लगते है-ये धरती,ये नदिया,ये रैना ,और तुम [बालिका वधु ](राग-देवगिरी बिलावल)
बड़े अच्छे लगते है
जिन दर्शन
जिन वाणी
जिन पूजा
और
जिनवर
१
मैंने भक्ति भाव से प्रभू- तेरी पूजा रचायी
मुझ पर ऐसी कृपा करना, अब -जिसमे हो मेरी भलाई
बड़े अच्छे लगते है
जिन मंदिर
जिन वेदी
जिन मूरत
और
जिनवर
२
उतम क्षमा ,मार्दव ,आर्जव -सत्य,शौच,संयम,तप
त्याग आकिंचन ब्रहमचर्य का -सारे जग में हो पालन
बड़े अच्छे लगते है
ये पिछी
ये कमंडल
ये मुनिवर
और
जिनवर
बड़े अच्छे लगते है
जिन दर्शन
जिन वाणी
जिन पूजा
और
जिनवर
रचयिता -राजू बगडा-"राजकवि"(सुजानगढ़)मदुरै
ता; २७.८.२०११
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