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अजी रूठ कर अब कहां जाइयेगा (आरजू) (राग-देश)
प्रभूs आsप मेरेs, हियेs मेंsही, बसिये
मेरेs कर्म जब तक, नहींs साsरे नसिये
प्रभूs आsप मेरेs
1
मैं चारों गती में, फिराs मारा माराs
मुझे कोई अब तक, मिला ना, सहाराs
बङे पुण्योssदय सेss तेरा संग मिला है 2
ना बिसराइयेssगा ना बिसराssइयेगा
प्रभूs आsप मेरेs, हियेs मेंsही, बसिये
मेरेs कर्म जब तक, नहींs साsरे नसिये
2
मैं कैसे करूंs, अपनी, इन्द्रियोंs को वश मेंs
नहीं मानें मन, वो, चले अपनी धुन मेंs
मुझे दूरss, भोगोs से कैसे है रहना 2
ये सिखलाइयेssगा ना बिसराssइयेगा
प्रभूs आsप मेरेs, हियेs मेंsही, बसिये
मेरेs कर्म जब तक, नहींs साsरे नसिये
प्रभूs आsप मेरेs 2
रचयिता -राजू बगडा-"राजकवि"(सुजानगढ़)मदुरै
ता;-24.8.2025 (7.30 am)
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