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तर्ज;-उड़ती कुरजरिया -मारवाडी लोक गीत
१
पहलों तो संदेशो म्हारो वीर प्रभु न दीज्यो थे -२
भारत री जनता रो थे प्रणाम दीज्यो हे -उड़ती कुरजरिया
अर र र -उड़ती कुरजरिया -----------------
२
हिंसा झूठ में कुछ नही रखा-आ जनता न कीज्यो थे -२
प्रेम भाव री बाता थोडी सिखला दी ज्यो हे -उड़ती कुरजरिया
अर र र -उड़ती कुरजरिया ------------------
३
लोभ पाप और मान कषाया रो विष पीणो छोड़ दो-२
प्रेम रो अमृत जनता न पीणो बतलाईज्यो हे -उड़ती कुरजरिया
अर र र -उड़ती कुरजरिया ---------------------
रचयिता -राजू बगडा-"राजकवि"(सुजानगढ़)मदुरै
ता ;-१५.०८.१९७९
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