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Friday, August 1, 2008

23 तर्ज;-दस बहाने करके ले गई दिल (दस)

23 
तर्ज;-दस बहाने करके ले गई दिल (दस)

है ना -है ना ,देखो जिनवर की भक्ति में जादू
है ना -है ना ,देखो जिनवर की भक्ति में जादू

उसकी आँखों में चमके चंदा और तारे
सेय है ना है ना ---सेय है ना है ना
उसकी आँखों में चमके ,चंदा और तारे
तारा उसने बहुतों को ,मुझको भी तारे
उत्तम क्षमा मार्दव आर्जव ,सत शौच संयम अपनाओ
उत्तम तप त्याग आकिंचन और ब्रहमचर्य धर्म निभाओ
दश धर्म की महिमा अपरमपार-अपरमपार
दस धर्म की महिमा अपरमपार -इट्स ओनली हेपनिंग हियर
अंतरा-१

है ना है ना -देखो जिनवर की भक्ति में जादू
है ना है ना -सेय है ना है ना

ये दिल तो पहले -पापी बहुत था
पापों में डूबा हरदम -कर ता धरम क्यूँ
दुःख ने जब घेरा -सब ने मुंह फेरा
मन में यूँ सोचा -अबतक बना मै मुरख क्यूँ
जिनवर की --शरण में
आया हूँ मै --जब से
मिल गई है --सुख शान्ति
जिन जी के -चरण में
दश धरम की महिमा अपरमपार -अपरमपार
दश धरम की महिमा अपरमपार -इट्स ओनली हेपनिंग हियर
है ना है ना -सेय है ना है ना

मानव जीवन की ,गाथा निराली
चारों गतियों में सबसे अलग महान है
स्वर्गो में नहीं , मिलते देवों को
तप और त्याग के ये अवसर महान है
थोड़ा सा टाइम तूं
तप त्याग में लगाले
दश धर्मो के द्वारा
कर्मो को --जलाले
दश धर्म की महिमा अपरमपार -अपरमपार
दश धर्म की महिमा अपरमपार -इट्स ओनली हेपनिंग हियर
है ना है ना सेय है ना है ना
उसकी आंखों में चमके चंदा और तारे
तारा उसने बहुतों को मुझको भी तारे -----उत्तम क्षमा -------------
रचयिता -राजू बगडा-"राजकवि"(सुजानगढ़)मदुरै
ता;३१.०८.२००६
www.rajubagra.blogspot.com