Saturday, August 23, 2025

11 तर्ज- और रंग द रे भाया ओजू रंग द -मारवाड़ी

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तर्ज- और रंग द रे भाया ओजू रंग द -होली गीत
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वीर जन्म्या,तिर्थंकर, वीर जन्म्या -२
माता त्रिशला न भेजोs  बधाई रे ,नगरी म वीर जन्म्या

देव औ कुबेर, राजा, इन्द्र पधार्या
म्हारी नगरी म रतन,बरसाया रे , नगरी म वीर जन्म्या

पूजा रा कपङा म्हारः ,पीला रंगवाया-
म्हाराः सुसराजी को मन हर्षायो रे , नगरी म वीर जन्म्या

पूजा की थालीः म्हानः ,पीली  घङवायी-२
म्हाराः सासुजी को मन हर्षायो रे , नगरी म वीर जन्म्या

पूजा री केसर,पीलीः ल्यायी जेठानी-२
म्हारा जेठ जी को मन हर्षायो रे , नगरी म वीर जन्म्या

मदुरै नगरी म,पीलाः लाडू ,बंटवाया
म्हारा देवर जी को मन हर्षायो रे ,नगरी म वीर जन्म्या

रचयिता -राजू बगडा-"राजकवि"(सुजानगढ़)मदुरै
28.3.2010
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Thursday, August 21, 2025

108 तर्ज मैं शायर तो नहीं,मगर ए हसीं (बाॅबी) (राग-कीरवानी)

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तर्ज मैं शायर तो नहीं,मगर ए हसीं (बाॅबी) (राग-कीरवानी)

मैं ज्ञानी, तोss नहींss,2
मगरss हेss प्रभूss,
जब से दर्शन, हुआ तेरा, मुझमें
चेतनाss आs गयीss
मैं भोगी तोss नहींss
मगरss हेss प्रभूss,
जब से दर्शन,हुआ तेरा, मुझमें
विरक्तिss आs गयीss
मैं लोभी तोss नहींss
मगरss हेss प्रभूss,
जब से दर्शन,हुआ तेरा मुझमें
त्याज्यताss आs गयीss
1
धर्म का नाम ,मैंने सुना था मगर]
धर्म क्या है, ये मुझको नहीं थी खबर ]2
जब से गुरुओं का उपदेश सुनने लगा
मन मेरा भी, कुछ कुछ, बदलने लगा
मैं पापी तो नहींss 2
मगरss हेss प्रभूss,
जब से दर्शन, हुआ तेरा मुझमें
सरलताss आs गयीss- 
मैं ज्ञानी, तोss नहींss-----
2
सोचता हूं ,प्रभू तुमसे कुछ  मांगता]
चरणों में,झुक के, तेरे ,मैं क्या मांगता]2
जब से दश धर्म पालन मैं करने लगा
क्रोध माया से, मैं,-दूर होने लगा
मैं क्रोधी तो नहीं 2
मगरss हेss प्रभूss,
जब से दर्शन, हुआ तेरा मुझमें
सौम्यताss आs गयीss
मैं ज्ञानी, तोs नहींss
मगर हेss प्रभूss,
जब से दर्शन, हुआ तेरा मुझमें
चेतनाss आs गयीss

रचयिता राजू बगङा "राजकवि"(sujangarh) मदुरै
21.8.2025 (11.45 pm )
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