Saturday, July 19, 2025

103 तर्ज किसी राह में किसी मोङ पर,कहीं चल न देना तू छोङ कर (मेरे हमसफ़र)(राग-चारुकेशी)

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 तर्ज किसी राह में किसी मोङ पर,कहीं चल न देना तू छोङ कर (मेरे हमसफ़र)(राग-चारुकेशी)

किसी राsह में,किसी मोsङ पे 2
मिल जाय,मुनिवर कीs शरण
होs जाये तब,जीsवन सफल
गुरु को नमन,गुरु को नमन
किसी दुःख में,किसी कष्ट में 2
मिल जाय,गुरू आशिर्वचन 
हो जाये तब,जीवन सफल
गुरु को नमन,गुरु को नमन
1
ता-उम्र करते हैं, पाsप,  हम 2
फिर भी,समझ नहीं, पाsते हम
ये कैsसा,माया जाsल है
बुनतेs भी हम,
रोsतेs भी हम
कैसे मिले,गुरू की शरण 2
किसी राsह पे,किसी मोsङ पे
मिल जाय, 
मुनिवर कीs शरण
 हो जाये तब,जीsवन सफल,
गुरु को नमन,गुरु को नमन
2
गुरू सूर्य सम, गुरु चन्द्र सम 2
ध्रुव तारे सम,नक्षत्र सम
दिखलाsते,सुख की राsह को
मिट जाsते,
मन के -सब भरम 
जब मिलती हैं,गुरू की शरण 2
किसी राsह पे,किसी मोsङ पे
मिल जाय, 
मुनिवर कीs शरण
हो जाये तब,जीवन सफल
गुरु को नमन,गुरु को नमन
किसी दुःख में,किसी कष्ट में 2
मिल जाय,गुरू आशिर्वचन 
हो जाये तब,जीsवन सफल
गुरू को नमन,गुरू को नमन 

रचयिता -राजू बगड़ा "राजकवि"(सुजानगढ़) मदुरै
ताः 20.7.2025 ( 6.30am)
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