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तर्ज यशोमती मैया से बोले नन्दलाला (सत्यम शिवम सुन्दरम)(राग-काफी)
भटके हुये हैं सुनलोss,विनती हमारीss 2
1
दीन दयाला जग के नाsथ कहातेs
दुःखियों की नैय्या को पार लगाsते
जग में तुम्हारी महिमा होsssss
जग में तुम्हारी महिमा सबसे निराsली
इसीलिए प्यारी
प्रभूs तेरे चरणों केss,हम है पुजारीss
भटके हुये हैं सुनलोss,विनती हमारीss
2
अंजन सा पापी तारा,मैना के दुःख को टाराss
हमको भी नाथ अब तोs,दे दोs सहाsराss
शरण पङे हैं तेरी होsssss
शरण पङे हैं तेरी,काटो भव की फेरीss,
विनती हमारी
प्रभूs तेरे चरणों केss,हम है पुजारीss
भटके हुये हैं सुनलोss,विनती हमारीss
रचयिता -राजू बगड़ा "राजकवि"(सुजानगढ़) मदुरै
31.8.1979
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