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मै मुक्ति पद पाउँगा -२
दश धर्म निभाऊंगा
दश धर्म मै निभाऊंगा
१
बदले की अग्नि में जलना
ख़ुद को है भव भव घुमाना
हिंसा की अग्नि बुझाना
क्षमा का नीर बहाना ---------मै क्षमा को धारूंगा -२
दश धर्म निभाऊंगा ----------दश धर्म मै निभाऊंगा
२
चरणों में आया हूँ वीरा
शीतलता मुझ को मिल जाए
मुरझाई ज्ञान लता ये
तेरी कृपा से खिल जाए --------------- मै ज्ञान को पाउँगा -२
दश धर्म निभाऊंगा -----------------दश धर्म मै निभाऊंगा
३
आतम का भेद ना जाना
पुदगल से मोह लगाना
कैसे सुनाऊ अपनी पीड़ा
कितना अभागा हूँ महावीरा-------------तेरा ध्यान लगाऊंगा -२
दश धर्म निभाऊंगा ----------------दश धर्म मै निभाऊंगा
मै मुक्ति पद पाउँगा ---------------------
रचयिता -राजू बगडा-"राजकवि"(सुजानगढ़)मदुरै
तर्ज;-तुम्हें गीतों में ढालूँगा -(सावन को आने दो)
(राग-शिवरंजनी)
मै मुक्ति पद पाउँगा -२
दश धर्म निभाऊंगा
दश धर्म मै निभाऊंगा
१
बदले की अग्नि में जलना
ख़ुद को है भव भव घुमाना
हिंसा की अग्नि बुझाना
क्षमा का नीर बहाना ---------मै क्षमा को धारूंगा -२
दश धर्म निभाऊंगा ----------दश धर्म मै निभाऊंगा
२
चरणों में आया हूँ वीरा
शीतलता मुझ को मिल जाए
मुरझाई ज्ञान लता ये
तेरी कृपा से खिल जाए --------------- मै ज्ञान को पाउँगा -२
दश धर्म निभाऊंगा -----------------दश धर्म मै निभाऊंगा
३
आतम का भेद ना जाना
पुदगल से मोह लगाना
कैसे सुनाऊ अपनी पीड़ा
कितना अभागा हूँ महावीरा-------------तेरा ध्यान लगाऊंगा -२
दश धर्म निभाऊंगा ----------------दश धर्म मै निभाऊंगा
मै मुक्ति पद पाउँगा ---------------------
रचयिता -राजू बगडा-"राजकवि"(सुजानगढ़)मदुरै
ता;-२०.०८.१९८०
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