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तर्ज- मेरी भीगी भीगी सी पलकों में रह गए,(अनामिका)(राग-कीरवानी)
हे पार्श्व प्रभु, तेरे चरणों में
हम रोज नमन करतेsss
करे मन मेरा भी,तुम सा बनूं मैं
कर्म के बन्धन टूटे
हे पार्श्व प्रभु...........
हम रोज नमन करतेsss
करे मन मेरा भी,तुम सा बनूं मैं
कर्म के बन्धन टूटे
हे पार्श्व प्रभु...........
1
तुम्हें बिन जाने,बिन पहचाने,जन्म अनेकों गंवाये - 2
आज हमें जब ज्ञान मिला तो,तेरे चरणों में आये
चारों गतियों में दुःख जो उठाये
तड़प के आहे भर भर के
करे मन मेरा भी,तुम सा बनूं मैं
कर्म के बन्धन टूटे
हे पार्श्व प्रभु...........
तुम्हें बिन जाने,बिन पहचाने,जन्म अनेकों गंवाये - 2
आज हमें जब ज्ञान मिला तो,तेरे चरणों में आये
चारों गतियों में दुःख जो उठाये
तड़प के आहे भर भर के
करे मन मेरा भी,तुम सा बनूं मैं
कर्म के बन्धन टूटे
हे पार्श्व प्रभु...........
2
तू ही इक सहारा ,नश्वर जग में,
तू ही इक सहारा ,नश्वर जग में,
भव से जो पार कराये - 2
जनम जनम के पाप करम से,
जनम जनम के पाप करम से,
हम को भी मुक्ति दिलाये
ऐसी ही आशा, ले के हम आये
तेरीs दया पाsने को
करे मन मेरा भी,तुम सा बनूं मैं
कर्म के बन्धन टूटे
हे पार्श्व प्रभु...........
ऐसी ही आशा, ले के हम आये
तेरीs दया पाsने को
करे मन मेरा भी,तुम सा बनूं मैं
कर्म के बन्धन टूटे
हे पार्श्व प्रभु...........
रचयिता -राजू बगड़ा "राजकवि"(सुजानगढ़) मदुरै
-22.9.2018/12.30 am
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