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तर्ज मेरा दिल ये पुकारे आजा (नागिन)(राग-दरबारी)
छुटsकारा दुखों से पा जा
भोगो के जंजाल से
मोह माया जाल से
गुरुsवर की शरण में आ जा
छुटsकारा दुखों से पा जा
भोगो के जंजाल से
मोह माया जाल से
गुरुsवर की शरण में आ जा
१
चारों गतियों में फिरता फिरे, क्यूं फिरे क्यूं फिरे-2
कोई नहीं है तेरा
स्वार्थ का है ये घेरा
बस इतना सा ज्ञान जगा जा
भोगो के जंजाल से
मोह माया जाल से
गुरुsवर की शरण में आ जा
२
तप करके ही बुझती है आग मन की ,मन की-2
कर s उपवास तूं,
संयम को धार तूं
बस, इतनीसी लगन लगा जा
भोगो के जंजाल से
मोह माया जाल से
गुरुsवर की शरण में आ जा
भोगो के जंजाल से
मोह माया जाल से
भोगो के जंजाल से
मोह माया जाल से
गुरुsवर की शरण में आ जा
रचयिता -राजू बगड़ा "राजकवि"(सुजानगढ़) मदुरै
21.9.23 (00.05)
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