Sunday, September 12, 2021

74 तर्ज जे हम तुम चोरी से बंधे इक डोरी से ( धरती कहे पुकार के)

74 
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तर्ज जे हम तुम चोरी से बंधे इक डोरी से ( धरती कहे पुकार के)

जे हम तुम भक्ति से, कहेंगे गुरुवर सेsss
आयेंगे मिलने, वो जरूर
अरे ये वादा है,गुरू काsss
1
भेष दिगम्बर धारे, ये गुरुवर है हमारे  2
तपसी बहुत बड़े ये, पिछी कमंडल वाले
आयेगाsss रे मजा रे मजा
भक्ति मेंss रमने का
जे हम तुम भक्ति से, कहेंगे गुरुवर से
आयेंगे मिलने वो जरूर
अरे ये वादा है,गुरू काsss
2
राग द्वेष नहीं करते, अsहिंसा व्रत को पाले 2
मूल अठाईस गुण का, ये पालन करने वाले
आयेगाsss रे मजा रे मजा
भक्तिss में रमने का
जे हम तुम भक्ति से, कहेंगे गुरुवर से
आयेंगे मिलने वो जरूर
अरे ये वादा है,गुरू का
3
पैदल विचरण करते, सर्दी गर्मी नहीं जाने 2
अंजुली में लेकर के,वो एक समय ही खाते
आयेगाsss रे मजा रे मजा
भक्तिss में रमने का
जे हम तुम भक्ति से, कहेंगे गुरुवर से
आयेंगे मिलने वो जरूर
अरे ये वादा है,गुरू का

रचयिता -राजू बगड़ा "राजकवि"(सुजानगढ़) मदुरै
ता; 12.9.2021  4.45 pm
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