Monday, April 6, 2026

110 मां की याद में --तर्ज-जिंदगी देने वाले सुन, (दिले नदान)राग भूपाली

जिन्दगी देने वाली मां
कैसे तेरा करूं शुक्रियाsss
कैसे खुद का,सम्भालूं जियाssss
1
रात कटती नहीं,दिन गुजरता नहींsss2
मांss तेरे बिना,   अच्छा लगता नहींssss
आंख वीरान है,दिल परेशान है,छाया अन्धकार है
कैसे काबू  करूं ये जियाssss
जिन्दगी देने वाली मां
कैसे तेरा करूं शुक्रियाsss
कैसे खुद का,सम्भालूं जियाssss
2
तुझको जाने की ऐसी क्या जल्दी हुयीssss2
छोङ किसके भरोसे,  तूं मुझको गयीssss
आंख वीरान है,दिल परेशान है,छाया अन्धकार है
कैसे काबू करूं ये जियाssss
जिन्दगी देने वाली मां
कैसे तेरा करूं शुक्रियाsss
कैसे खुद का,सम्भालूं जियाssss
मांssssss
मांssssss
रचयिता -राजू बगड़ा "राजकवि"(सुजानगढ़) मदुरै
ताः5.4.2026,(4.30am)