Sunday, November 14, 2010

13 तर्ज सुरमयी अंखियों में नन्हा मुन्ना इक सपना दे जा रे - [सदमा] राग-पीलू

13 
www.rajubagra.blogspot.com 
तर्ज सुरमयी अंखियों में नन्हा मुन्ना इक सपना दे जा रे - [सदमा] (राग-पीलू)
प्रभु चरणों में आकर
मुझको बड़ा अच्छा लगता है -२
प्रभु मेरे सच्चे साथी है
भव भव से वो साथी है -रा री रा री ओ रारी ओ

देव गुरु ब्रहस्पति भी अपने
ज्ञान से प्रभु गुण गा नहीं पाते
ऐसे में मुझ अ$ज्ञानी की ,स्तुति सुन के
होती है सब जग में हँसी
फिर भी मै करता स्तुति ---------प्रभु चरणों में आकर ------

तीन लोक की सुन्दरता यदि
रूप बदलकर प्रभु सम आवे
प्रभु चेहरे को ,देखकर इक पल में ही
शरम से मुरझाने लगे
और फिर ये गाने लगे ------------प्रभु चरणों में आकर ------------

पंचेंद्रियो को वश में करके
चंचल मन को वश में करके
खुद को जीता ,इसलिए दुनिया वाले
महा वीर कहने लगे
तेरे गुण गाने लगे ------------प्रभु चरणों में आकर ---------------
रचयिता -राजू बगडा-"राजकवि"(सुजानगढ़)मदुरै
ता;१४-११-२०१०
www.rajubagra.blogspot.com 

No comments: